सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ सेंटर (Vantara Wildlife Centre) पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के गठन का आदेश दिया है।
क्यों बनी SIT?
यह फैसला उन दो जनहित याचिकाओं (PILs) के बाद आया है जिनमें आरोप लगाया गया था कि वनतारा में
- अवैध तरीके से वन्यजीवों का ट्रांसफर किया गया,
- हाथियों को गैरकानूनी तरीके से कैद रखा गया,
- और कई अन्य नियमों का उल्लंघन हुआ।
वनतारा वाइल्डलाइफ सेंटर रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा समर्थित है और इसका प्रबंधन अनंत अंबानी करते हैं।
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SIT किन मामलों की जांच करेगी?
सुप्रीम कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया है कि वह इन बिंदुओं पर जांच करे:
- हाथियों समेत जानवरों की खरीद और ट्रांसफर की प्रक्रिया
- वन्यजीव संरक्षण कानून, 1972 (Wildlife Protection Act) का पालन
- CITES (अंतरराष्ट्रीय समझौता) के नियमों का अनुपालन
- पशुओं की देखभाल और चिकित्सा सुविधाओं के मानक
- निजी कलेक्शन रखने के आरोप
- पानी या कार्बन क्रेडिट्स के दुरुपयोग के आरोप
- वित्तीय गड़बड़ियां
SIT को अपनी रिपोर्ट 12 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में सौंपनी होगी। इसके बाद यह मामला 15 सितंबर को दोबारा सुना जाएगा।
मामला कैसे शुरू हुआ?
यह विवाद तब बढ़ा जब 36 साल की मादा हाथी महादेवी (जिसे माधुरी भी कहा जाता है) को कोल्हापुर से जामनगर स्थित वनतारा में शिफ्ट किया गया। यह ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जुलाई में हुआ था, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और याचिकाएं दायर की गईं।
वनतारा का पक्ष
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वनतारा ने कहा:
“हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं। वनतारा पूरी पारदर्शिता और कानून के पालन के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य हमेशा से ही जानवरों का बचाव, पुनर्वास और देखभाल रहा है। हम SIT के साथ पूरा सहयोग करेंगे।”
SIT में कौन-कौन होंगे?
इस जांच समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर करेंगे। इनके साथ होंगे:
- उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राघवेंद्र चौहान
- मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर हेमंत नगराले
- वरिष्ठ IRS अधिकारी आनिश गुप्ता